मंगलवार, 17 मई 2011

stavan

लक्ष्य हैं ऊँचा हमारा, हम विजय के गीत गाये
चीर कर कठिनाइयो को , दीप बन हम जगमगाए

तेज सूरज सा लिए हम, शुभ्रता शशि सी लिए
पवन सा गति वेग ले  कर ,कदम ये आगे बडाये

हम न रुकना जानते है ,हम ना झुकना जानते है
हो प्रबल संकल्प इतना, आपदाए सर झुकाए

हम अभय निर्मल निरामय, है अटल जेसे हिमालय
हर कठिन जीवन घडी में फूल बन हम मुस्कुराये

हैं प्रभु पा धरम तेरा हो गया अब नव सवेरा
प्राणों का भी अर्घ्य देकर ,मृत्यु से अमरत्व  पाए

मंगलवार, 26 अप्रैल 2011

जिया कब तक  उलझेगा  ,संसार विकल्पों में
कितने भव बीत गये ,संकल्प विकल्पों में


ऊड ऊड के ये चेतन गति गति में भटकता हैं
भोगो में लिप्त सदा भव भव दुःख पाता
निज तो न सुहाता हैं पर ही मन भाता हैं
ये जीवन बीत रहा संसार विकल्पों में


तू कोण कहाँ का हैं और क्या हैं नाम तेरा
आया किस घर से हैं और जाना किस गावं अरे
अन्तेर मुख हो जाता तो सुख अविकल्पो में
ये  तन   तो पुद्गल  हैं  दो  दिन  का ठाट  अरे
                     जिया कब तक..........
यदि अवसर चूका तो  भव भव पछतायेगा
ये नर भव कठिन महा किस गति में पायेगा 
नर भव भी पाया तो जिन कुल नहीं पायेगा
अनगिनत जन्मो में अनगिनत विकल्पों में

सोमवार, 4 अप्रैल 2011

be positive part 2

 पिछले  पार्ट  में बात  की  थी हमने  संगति को सुधारने की ... अब बात करते हैं  की खुद के स्तर पर क्या करना हैं ....... हमें खुद सजग रह कर ध्यान देना हैं कि हमारी खुद कि बोली में कितनी नकारात्मकता रही हैं ..खुद तो ध्यान रखे ही अपने यार दोस्तों को भी कहे कि वे आपकी बोली पर समय समय पर ध्यान रखकर आपको सजग करते रहे .....
                         अपने मित्रो को आप समय समय पर प्रोत्साहित कर के उनमे सकारात्मकता का संचार करे ,इसका एक फायदा यह भी होगा कि आपके  यार मित्र भी आपको इसी प्रकार सकारात्मक बाते बोल कर सकारात्मक दिशा देने में मदद करेंगे ... 


             इसके अलावा कुछ पंक्तियों का मंत्र प्रतिदिन दोहरा कर भी सकारात्मकता की दिशा में प्रवृत हुआ जा        
     सकता हैं ,यह मंत्र इस प्रकार हैं :--

   १. "मैं स्वस्थ हूँ ,मेरे सरे मनो राग दूर हो रहे हैं ".

   २."  मैं शक्तिमय  हूँ, अनंत शक्ति का स्वामी हूँ ,मेरी सारी  दुर्बलताए दूर हो रही हैं ".

   ३."मैं आनंद स्वरूप हूँ ,मेरे सारे तनाव दूर हो रहे  हैं ,आनंद .. आनंद ....आनंद ..!

   ४."मैं पवित्र हूँ ,पवित्रता मेरा स्वभाव हैं ,मेरे सारे विकार दूर हो रहे हैं ".
  
                              इस मंत्र को मन में गहरे मनन करते हुए दोहराते रहने से आपमें  एक ऐसी शक्ति का संचार होगा जो कि आपको हर क्षेत्र में सफलता दिलाने में सहायक रहेगी ...
  कहते भी हैं मन के जीते जीत हैं मन के हारे  हार ,अर्थात  मन में जीत के प्रति सकारात्मक सोच बन गयी तो फिर जीत आप से दूर नहीं !!!!!!!!!!

शुक्रवार, 1 अप्रैल 2011

be positive part 1

जीवन मे अपार शक्ति रही हुई हैं , जरुरत होती है उसउस शक्ति को प्रकट करने के और उसे सकारात्मक दिशा मे प्रवाहित  करने की .जीवन की इस अपार शक्ति को प्रकट करने के लिए सकारात्मक सोच की आवश्यकता होती है ,सकारात्मक सोच व्यक्ति को सृजनात्मकता की और उन्मुख करती है .

                        सकारात्मक सोच कैसे बनाई जाये इसके लिए कुछ आचार विचारो को बदलने की और अपनी संगती मे आवश्यक सुधर करने की आवश्यकता होती हैं . आम तौरपर देखा जाता हैं की व्यक्ति सकारात्मक सोचने की और प्रवृत होना चाहता  है ,लेकिन वहसफल नहीं हो पता हैं इसका कारन उसके आचार विचार और बोलने के अंदाज़ से देखा  जा  सकता हैं .एक बच्चा  पेपर  लिख  कर आता हैं  तो  उसकी प्रशंसा में दूसरा व्यक्ति बोलता हैं ,इसने तो पेपर फोड़  डाला .पेपर को अच्छा करना सकारात्मक सोच का प्रदर्शन करता हैं,लेकिन "पेपर फोड़ना "उच्चारण बोलने वाले व्यक्ति की विधवंसात्मक  सोच ,जो की उसके अंतरतम मे गहरी समाहित  रही होती है को प्रदर्शित करता हैं . और इस प्रकार के व्यक्ति की सांगत करने वाला व्यक्ति भी धीरे धीरे वैसे ही  शब्दो का  उच्चारण करने लग जाता है ...

                             इस तरह अनजाने में ही विध्वनसात्मक  सोच उसके अंदर भी धीरे धीरे हावी होने लग जाती हैं . इस लिए धयान रखना चाहिये कि यदि आप ऐसे व्यक्ति की संगत कर रहे हो तो ध्यान रखो कि उसकी संगति भले ही मत छोड़ो ,लेकिन उसे समय समय पर उसके नकारात्मक शब्दों की तरफ उसका ध्यान  दिला कर उसकी नकारात्मक प्रवृतियों को छुड़ा दो.   इससे न केवल उसका भला होगा अपितु इस्सका प्रभाव आप पर भी दिखाई देगा .