शुक्रवार, 1 अप्रैल 2011

be positive part 1

जीवन मे अपार शक्ति रही हुई हैं , जरुरत होती है उसउस शक्ति को प्रकट करने के और उसे सकारात्मक दिशा मे प्रवाहित  करने की .जीवन की इस अपार शक्ति को प्रकट करने के लिए सकारात्मक सोच की आवश्यकता होती है ,सकारात्मक सोच व्यक्ति को सृजनात्मकता की और उन्मुख करती है .

                        सकारात्मक सोच कैसे बनाई जाये इसके लिए कुछ आचार विचारो को बदलने की और अपनी संगती मे आवश्यक सुधर करने की आवश्यकता होती हैं . आम तौरपर देखा जाता हैं की व्यक्ति सकारात्मक सोचने की और प्रवृत होना चाहता  है ,लेकिन वहसफल नहीं हो पता हैं इसका कारन उसके आचार विचार और बोलने के अंदाज़ से देखा  जा  सकता हैं .एक बच्चा  पेपर  लिख  कर आता हैं  तो  उसकी प्रशंसा में दूसरा व्यक्ति बोलता हैं ,इसने तो पेपर फोड़  डाला .पेपर को अच्छा करना सकारात्मक सोच का प्रदर्शन करता हैं,लेकिन "पेपर फोड़ना "उच्चारण बोलने वाले व्यक्ति की विधवंसात्मक  सोच ,जो की उसके अंतरतम मे गहरी समाहित  रही होती है को प्रदर्शित करता हैं . और इस प्रकार के व्यक्ति की सांगत करने वाला व्यक्ति भी धीरे धीरे वैसे ही  शब्दो का  उच्चारण करने लग जाता है ...

                             इस तरह अनजाने में ही विध्वनसात्मक  सोच उसके अंदर भी धीरे धीरे हावी होने लग जाती हैं . इस लिए धयान रखना चाहिये कि यदि आप ऐसे व्यक्ति की संगत कर रहे हो तो ध्यान रखो कि उसकी संगति भले ही मत छोड़ो ,लेकिन उसे समय समय पर उसके नकारात्मक शब्दों की तरफ उसका ध्यान  दिला कर उसकी नकारात्मक प्रवृतियों को छुड़ा दो.   इससे न केवल उसका भला होगा अपितु इस्सका प्रभाव आप पर भी दिखाई देगा .