सोमवार, 4 अप्रैल 2011

be positive part 2

 पिछले  पार्ट  में बात  की  थी हमने  संगति को सुधारने की ... अब बात करते हैं  की खुद के स्तर पर क्या करना हैं ....... हमें खुद सजग रह कर ध्यान देना हैं कि हमारी खुद कि बोली में कितनी नकारात्मकता रही हैं ..खुद तो ध्यान रखे ही अपने यार दोस्तों को भी कहे कि वे आपकी बोली पर समय समय पर ध्यान रखकर आपको सजग करते रहे .....
                         अपने मित्रो को आप समय समय पर प्रोत्साहित कर के उनमे सकारात्मकता का संचार करे ,इसका एक फायदा यह भी होगा कि आपके  यार मित्र भी आपको इसी प्रकार सकारात्मक बाते बोल कर सकारात्मक दिशा देने में मदद करेंगे ... 


             इसके अलावा कुछ पंक्तियों का मंत्र प्रतिदिन दोहरा कर भी सकारात्मकता की दिशा में प्रवृत हुआ जा        
     सकता हैं ,यह मंत्र इस प्रकार हैं :--

   १. "मैं स्वस्थ हूँ ,मेरे सरे मनो राग दूर हो रहे हैं ".

   २."  मैं शक्तिमय  हूँ, अनंत शक्ति का स्वामी हूँ ,मेरी सारी  दुर्बलताए दूर हो रही हैं ".

   ३."मैं आनंद स्वरूप हूँ ,मेरे सारे तनाव दूर हो रहे  हैं ,आनंद .. आनंद ....आनंद ..!

   ४."मैं पवित्र हूँ ,पवित्रता मेरा स्वभाव हैं ,मेरे सारे विकार दूर हो रहे हैं ".
  
                              इस मंत्र को मन में गहरे मनन करते हुए दोहराते रहने से आपमें  एक ऐसी शक्ति का संचार होगा जो कि आपको हर क्षेत्र में सफलता दिलाने में सहायक रहेगी ...
  कहते भी हैं मन के जीते जीत हैं मन के हारे  हार ,अर्थात  मन में जीत के प्रति सकारात्मक सोच बन गयी तो फिर जीत आप से दूर नहीं !!!!!!!!!!