मंगलवार, 17 मई 2011

stavan

लक्ष्य हैं ऊँचा हमारा, हम विजय के गीत गाये
चीर कर कठिनाइयो को , दीप बन हम जगमगाए

तेज सूरज सा लिए हम, शुभ्रता शशि सी लिए
पवन सा गति वेग ले  कर ,कदम ये आगे बडाये

हम न रुकना जानते है ,हम ना झुकना जानते है
हो प्रबल संकल्प इतना, आपदाए सर झुकाए

हम अभय निर्मल निरामय, है अटल जेसे हिमालय
हर कठिन जीवन घडी में फूल बन हम मुस्कुराये

हैं प्रभु पा धरम तेरा हो गया अब नव सवेरा
प्राणों का भी अर्घ्य देकर ,मृत्यु से अमरत्व  पाए