गुरुवार, 16 मार्च 2023

राजस्थान के लोक नाट्य

 

ाजस्थान के लोक नाट्य

लोक-नाट्य

लोकनाट्य जनसाधारण के मनोरंजन के लिए जनसाधारण के द्वारा अभिनीत होते हैं। ये लोक नाट्य यहाँ के लोक वातावरण अंकुरित विकसित एवं प्रचारित हुए हैं।राजस्थानी लोक नाट्यों का कोई विशेष रंगमंच नहीं होता। किसी भी खुले स्थान, चौक आदि में तख्तों पर नाट्य होता है जिसका आनंद प्रायः सभी ओर बैठे दर्शक उठा लेते हैं। भीलों का गवरी नृत्य तो धरती पर ही हो जाता है।

राजस्थानी लोक नाट्यों में गीतों एवं नृत्य की प्रधानता रहती है। सभी नाट्य कथानक प्रधान होते हैं जिनमें ढोला-मारू, हीर रांझा, गोपीचंद, सुलतान- निहालदे, अमरसिंह राठौड़ आदि प्रमुख कथानक मंचित किए जाते हैं। – ख्यालनौटंकीरम्मतस्वांगगवरीतमाशाभवाईफड़रासलीलारामलीला – तुलसीदास जी द्वारासनकादिक लीला आदि राज्य के प्रमुख लोक-नाट्य है।

राजस्थान के प्रमुख लोकनाट्यों का वर्णन निम्नानुसार है:-

ख्याल

  • यह लोक नाट्य की वह विधा है जिसमें किसी धार्मिक, सामाजिक, ऐतिहासिक या पौराणिक आख्यान को पद्यबद्ध रचनाओं :के रूप में अलग-अलग पात्रों द्वारा गा-गाकर लोक मनोरंजन हेतु  प्रस्तुत किया जाता है। ख्याल लोक नाट्य में नगाड़ा व हारमोनियम प्रमुख वाद्य प्रयुक्त होते हैं। अन्य वाद्य सारंगी, मंजीरा, ढोलक आदि हैं। वर्तमान में  ख्याल एक पेशेवर लोक नाट्य बन गया हैं।
  • राजस्थान के विभिन्न हिस्सों में कुचामणी, शेखावाटी, जयपुरी, अली बख्शी, तुर्रा कलंगी, किशनगढ़ी, मांची, हाथरसी आदि भिन्न-भिन्न ख्यालों के स्वरूप प्रचलित रहे हैं।

 

 1. कुचामनी ख्याल:

  • – इस ख्याल शैली के प्रवर्तक लच्छीराम थे। इन्होंने गोगा चोहाण, मीरा मंगल, राव रिणमल आदि ख्यालों की रचना की थी । उगमराज कुचामनी ख्याल के प्रमुख कलाकार हैं। इसमें महिला पात्रों की भूमिका पुरूषों द्वारा ही निभायी जाती हैं। 
  • – इसका स्वरूप ‘ओपेरा’ जैसा होता हैं। 
  • – मुख्य कथाएं – गोगा चोहाण,चांद नीलगिरि, राव रिड़मल, मीरा मंगल,अल्हादेव आदि। 

 

2. जयपूरी ख्याल:- इसमें महिला पात्रों की भूमिका महिला ही निभाती हैं।

- मुख्य कथाएं 1. जोगी जोगन, 2. कान - गूजरी, 3. पठान, 4. मियां-बीबी, 5. रसीली तम्बोलन। इसके प्रमुख कलाकार 'गुणीजन खाना' के कलाकार रहे हैं।

 

3. हेला ख्याल:- यह दौसा, लालसोट एवं सवाई माधोपुर क्षेत्र में प्रसिद्ध है । लम्बी टेर देना इसकी विशेषता है  जिसे 'हेला' देना कहते हैं।  वाद्य यंत्रः नौबत

प्रवर्तक:शायर हेला

 

4. तुर्रा-कलंगी ख्याल(see next post)


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